Monday, September 19, 2022

एक टुकड़ा कपड़े का

एक टुकड़ा कपड़े का
रंग वही पुराने तीन

कुछ ने छोड़े ख्वाब
कुछ हुए इसकी रक्षा में लीन

कुछ ने घर छोड़ा
कुछ ने छोड़ दिया अपना गांव

कुछ ने शहर छोड़ा
कुछ ने लगाया ज़िन्दगी पर दांव

कुछ ने छोड़ा परिवार
कुछ ने छोड़ा हर किसी से लगाव

कुछ ने खुशियां दांव पर लगाई
कुछ ने सारी दौलत लुटाई

भावनाओं का बवंडर भी
कितना अनोखा है

जो जितना महसूस करे
उसे उतना ही सताता है

इतना सब कुछ छोड़कर भी
ज़रा भी नहीं घटती इनके चेहरों से मुस्कान

न घटने देते हैं इसकी शान
सदा बढ़ाते है इसका मान

आख़िर है तो एक कपड़े का टुकड़ा ही
रंग वही पुराने तीन

-मंजू

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