Tuesday, May 10, 2022

लकीरें

ऐ नन्हीं-सी जान
तूने इन छोटे-छोटे हाथों की
धुंधली-सी लकीरों में
क्या-क्या लिखवाया है?



क्या खोएगा, क्या पाएगा
पूरा हिसाब लेकर आया है?

कब हंसेगा, कब रोएगा
यह भी लिखवाया है?

कौन मिलेगा, कौन बिछड़ेगा
क्या यह भी लिखवाया है?

कौन आएगा, कौन जाएगा
इसका हिसाब भी लाया है?

वो कहते हैं
लकीरों में सब लिखा है

जिसे जो मिला है
लकीरों के हिसाब से ही मिला है

कभी न मायूस होना
लकीरों में नहीं.... तो ज़िन्दगी में भी नहीं

ज़िन्दगी में तो उनकी भी है
जिनकी लकीरें तो क्या..... हथेलियाँ ही नहीं।

-मंजू