आंखों में बसते हैं हजारों सपने....
जो जोश-ओ-जुनून न जगा पाए
वह साकार हो नहीं सकता।
यूं तो देखता है हर शख़्स सपने....
जो आग दिल में न जला पाए
वो पूरे कर नहीं सकता।
बेशक अंधेरा गुमनामी का हो घेरे तुम्हें....
जो रौशनी की दरकार दिल में न जगा पाए
वो जहां को रौशन कर नहीं सकता।
रौशनी की दरकार रखनी है बरकरार....
तो दिल में जुनून की लौ जलाओ
पत्थर बने इरादों से जहां रौशन नहीं होता।
बीज सपनों का तो कोई भी लगा दे....
जो सींच न पाए कड़ी मेहनत से
वो स"फल"ता पा नहीं सकता।
सपना नींद में देखा तो क्या देखा....
अरे जिसने सचमुच सपना देखा
वो सुकून से सो ही नहीं सकता।
नींद में सपने तो सभी देखते हैं....
सचमुच सपने देखने वाला
नींद का मोहताज नहीं होता।
नींद में सपने देखने वाले नींद में ही रह जाते हैं....
सपनों पर नींदें लुटाने वाले
सफलता की सीढ़ी चढ़ जाते हैं....।
-मंजू