Tuesday, October 19, 2021

ज़िन्दगी

तमाशा बनती जा रही है
लोगों की ज़िन्दगी
अब तमाशे वालों को
कोई नहीं देखता

बोझ बनती जा रही है
दिखावे की ज़िन्दगी
अब स्टेशन पर कुलियों को
कोई नहीं ढूंढता

क्या फूल क्या पत्तियाँ
सबकुछ यहाँ नकली है
अब असली फूलों को
कोई नहीं पूछता

झूठी लगने लगी है
सजावट की ज़िन्दगी
अब क़द्र भावनाओं की
कोई नहीं करता

फव्वारों की बौछारों में
मदहोश हैं सब
अब यहाँ बारिशों को
कोई नहीं पूछता

-मंजू