मन नहीं है लिखने का
बस लिखती जा रही हूँ
ख़ूबसूरत बहुत है यह ज़िन्दगी
यादें हज़ारों बटोरती जा रही हूँ
मन में तूफ़ान है विचारों का
हर विचार समेटती जा रही हूँ
न जाने कब तक समेट पाऊँगी
पल-पल टूटती जा रही हूँ
रेत पर बनी आकृति-सी
पल-पल मिटती जा रही हूँ
डर लगता है लिखने से भी
पल-पल सिमटती जा रही हूँ
भावनाओं के इस अनंत भंवर में
पल-पल धँसती जा रही हूँ
हर गुज़रते लम्हे के साथ
'मैं' पल-पल बिखरती जा रही हूँ
बिखरना हर बार अंत नहीं होता
धीरे-धीरे सब समझती जा रही हूँ
बिखरने के साथ-साथ
पल-पल निखरती जा रही हूँ
भावनाओं के तूफ़ान को रोकना
पल-पल सीखती जा रही हूँ
हज़ारों परेशानियां हैं फिर भी
हर-पल जीती जा रही हूँ
ज़िन्दगी का यह अनमोल सबक
हर रोज़ सीखती जा रही हूँ
भावनाओं का भँवर भी शांत होगा
जब चेहरे पर मुस्कान और मन साफ़ होगा
तूफ़ान कितना भी बड़ा हो
ख़ुद पर विश्वास रखना
इरादे पहाड़-से मज़बूत
और हल्की-सी मुस्कान रखना
-मंजू
Tuesday, September 27, 2022
Monday, September 19, 2022
एक टुकड़ा कपड़े का
एक टुकड़ा कपड़े का
रंग वही पुराने तीन
कुछ ने छोड़े ख्वाब
कुछ हुए इसकी रक्षा में लीन
कुछ ने घर छोड़ा
कुछ ने छोड़ दिया अपना गांव
कुछ ने शहर छोड़ा
कुछ ने लगाया ज़िन्दगी पर दांव
कुछ ने छोड़ा परिवार
कुछ ने छोड़ा हर किसी से लगाव
कुछ ने खुशियां दांव पर लगाई
कुछ ने सारी दौलत लुटाई
भावनाओं का बवंडर भी
कितना अनोखा है
जो जितना महसूस करे
उसे उतना ही सताता है
इतना सब कुछ छोड़कर भी
ज़रा भी नहीं घटती इनके चेहरों से मुस्कान
न घटने देते हैं इसकी शान
सदा बढ़ाते है इसका मान
आख़िर है तो एक कपड़े का टुकड़ा ही
रंग वही पुराने तीन
-मंजू
रंग वही पुराने तीन
कुछ ने छोड़े ख्वाब
कुछ हुए इसकी रक्षा में लीन
कुछ ने घर छोड़ा
कुछ ने छोड़ दिया अपना गांव
कुछ ने शहर छोड़ा
कुछ ने लगाया ज़िन्दगी पर दांव
कुछ ने छोड़ा परिवार
कुछ ने छोड़ा हर किसी से लगाव
कुछ ने खुशियां दांव पर लगाई
कुछ ने सारी दौलत लुटाई
भावनाओं का बवंडर भी
कितना अनोखा है
जो जितना महसूस करे
उसे उतना ही सताता है
इतना सब कुछ छोड़कर भी
ज़रा भी नहीं घटती इनके चेहरों से मुस्कान
न घटने देते हैं इसकी शान
सदा बढ़ाते है इसका मान
आख़िर है तो एक कपड़े का टुकड़ा ही
रंग वही पुराने तीन
-मंजू
Saturday, September 17, 2022
इमारतें
कुछ छोटी तो कुछ आसमान छूती हैं
ये इमारतें भी कितनी अजीब होती हैं
जो जितनी ऊंचाई पर रहता होगा
उसका इंतज़ार उतना लम्बा ही होगा
एक तरफ़ वो ज़मीन से दूरी सहता होगा
दूजी तरफ़ सूरज से वो तपता होगा
पंछियों का शोर तो सुन लेता होगा
पर पशुओं की आवाज़ से वंचित रहता होगा
ये इमारतें हैं या क्षितिज धरती का
नींव है ज़मीन और शिखर आसमान-सा
ज़मीन नदियों-सी चंचल है
आसमान स्थाई है पत्थर-सा
चंचल ज़मीन भी थम जाती है
जब आसमान में हलचल होती है
बादलों की नदी जब बहती है
ख़ामोश आसमां में भी आवाज़ें होती हैं
बरसता है जब बादल बूंदें बनकर
ज़मीन की हलचल भी थम जाती है
प्रकृति में इस फेर-बदल की साक्षी
यही इमारतें बनती हैं
न जाने क्यों ये इमारतें
इतनी अजीब होती हैं
-मंजू
ये इमारतें भी कितनी अजीब होती हैं
जो जितनी ऊंचाई पर रहता होगा
उसका इंतज़ार उतना लम्बा ही होगा
एक तरफ़ वो ज़मीन से दूरी सहता होगा
दूजी तरफ़ सूरज से वो तपता होगा
पंछियों का शोर तो सुन लेता होगा
पर पशुओं की आवाज़ से वंचित रहता होगा
ये इमारतें हैं या क्षितिज धरती का
नींव है ज़मीन और शिखर आसमान-सा
ज़मीन नदियों-सी चंचल है
आसमान स्थाई है पत्थर-सा
चंचल ज़मीन भी थम जाती है
जब आसमान में हलचल होती है
बादलों की नदी जब बहती है
ख़ामोश आसमां में भी आवाज़ें होती हैं
बरसता है जब बादल बूंदें बनकर
ज़मीन की हलचल भी थम जाती है
प्रकृति में इस फेर-बदल की साक्षी
यही इमारतें बनती हैं
न जाने क्यों ये इमारतें
इतनी अजीब होती हैं
-मंजू
Wednesday, September 14, 2022
मुस्कान
कितना शोर है ज़मीन पर
आसमां में ख़ामोशी छाई है
भीड़ बहुत है ज़मीन पर
आसमां में सिर्फ़ तन्हाई है
हलचल है यहाँ ज़मीन पर
आसमां पत्थर-सा स्थाई है
रौशन पहाड़ है ज़मीन पर
आसमां में अंधेरी खाई है
दीयों-सी रौशनी है ज़मीन पर
आसमां ने तारों की चादर बिछाई है
बेइंतहा ख़ूबसूरती है ज़मीन पर
आसमां में भी ख़ूब गहराई है
आसमां में ख़ामोशी छाई है
भीड़ बहुत है ज़मीन पर
आसमां में सिर्फ़ तन्हाई है
हलचल है यहाँ ज़मीन पर
आसमां पत्थर-सा स्थाई है
रौशन पहाड़ है ज़मीन पर
आसमां में अंधेरी खाई है
दीयों-सी रौशनी है ज़मीन पर
आसमां ने तारों की चादर बिछाई है
बेइंतहा ख़ूबसूरती है ज़मीन पर
आसमां में भी ख़ूब गहराई है
नदी बहती है ज़मीन पर
आसमां में हवा लहराई है
न जाने कहाँ से आज
यह हवा चलकर आई है
इसके आते ही चेहरे पर
हल्की-सी मुस्कान आई है
-मंजू
आसमां में हवा लहराई है
न जाने कहाँ से आज
यह हवा चलकर आई है
इसके आते ही चेहरे पर
हल्की-सी मुस्कान आई है
-मंजू
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