Tuesday, July 14, 2026

व्यक्तित्व

इन बाज़ारी खुशबुओं से

सिर्फ़ लिबास महकते हैं


महकते लिबास की खुशबूओं से

सिर्फ़ बेवकूफ़ बहकते हैं 


रूह बिना तो जिस्म भी

बदबूदार हो जाते हैं


हम... इन खुशबुओं से 

कहां प्रभावित होते हैं 


हमें तो व्यक्ति के व्यक्तित्व

व विचार प्रभावित करते हैं 


हमें इन लिबासी खुशबूओं से

महकने का कोई शौक़ नहीं 


हम तो वह हैं 

जिनके किरदार महकते हैं


- मंजू

Sunday, March 15, 2026

प्रेम

ये पिंजरा है ज़रूरत का

स्वतंत्र तुम्हें देख सकता नहीं

जकड़ता है कर्तव्य की बेड़ियों में

सशक्त तुम्हें करता नहीं


जो जकड़ता है वो प्रेम नहीं 

जो भटकता है वो प्रेम नहीं

जो तड़पता है एक झलक को

आंखों में आंसू लिए

ऐसे प्रेम का परिचय देना

कठिन तो है असंभव नहीं


प्रेम का पिंजरा नहीं

प्रेम की डाली होती है

रुक्मणि - राधा के कृष्ण की

मीरा मतवाली होती है


न भय है दूर जाने का

न मोह है साथ रहने का 

विश्वास की जड़ों से उत्पन्न

निस्वार्थ भाव से सींचे गए

जीवन के वृक्ष की डाली होती है।

- मंजू

Wednesday, May 7, 2025

उधार


बारिश से कह दो

कुछ बूंदें उधार दे दे


मुरझाए हुए पौधों को

जीवन का उपहार दे दे


ऊष्मा से तड़पते पक्षियों को

खुशियों की बौछार दे दे


रोते हुए चेहरों पर भी 

मुस्कान की बहार दे दे


इस आशाहीन जीवन को

आशाओं का अंबार दे दे


ऐ बारिश....

मुझे कुछ बूंदें उधार दे दे!



–मंजू

Saturday, March 29, 2025

तस्वीर

ज़िन्दगी की तस्वीर के
कुछ अंश धुंधले होते जा रहे हैं 
सफ़र की शुरुआत जहां से हुई
वो लम्हे अतीत के आग़ोश में खोते जा रहे हैं 

सफ़र में आगे बढ़ते हुए
कुछ नए अंश भी जुड़ते जा रहे हैं 
किंकर्तव्यविमूढ़ हुआ जाता है मन
क्या करूं क्या नहीं 

पुराने अंश देखूं तो 
नए अंश नहीं दिखते
नए अंश देखूं तो
पुराने अंश नहीं दिखते

ज़िन्दगी का आधार है परिवर्तन
पर किस हद तक
स्वीकार्य है ये परिवर्तन ?

मन में सवालों का अंबार है
जवाब किसी एक का भी नहीं
चेतन मन इस अचेतन तस्वीर में
चेतना ला पाएगा या नहीं ?

ज़िन्दगी की तस्वीर के धुंधले अंश
साफ़ हो पाएंगे या नहीं
या नए अंश भी धीरे धीरे 
धुंधले ही होते जाएंगे ?

- मंजू

Thursday, March 7, 2024

नैनीताल की वादियों से कुछ अनुभव

मन खो-सा जाता है

इन मनमोहक वादियों में


कोई हलचल न बची

फिलहाल मेरे इस मन में 


सुंदरता के अथाह सागर में

मन कुछ यूं गोते लगाता है


असीमित-अंतहीन दृश्य में 

ख़ुद को ही भूल जाता है


अद्भुत है यह अनुभव

शब्द भी कम भी कम पड़ जाते हैं


सीमित शब्दों में असीमित अनुभव

वर्णित ही नहीं हो पाते हैं 


फिर भी मन में निरंतर

नवीन विचार आते हैं 


हिमालय की गोद है

तकिया है बादलों का


आसमान की चादर है

और बिस्तर है नदियों का


दुनियादारी के शोर गुल से दूर

यहां गीत है पंछियों का


साज बनी है पेड़ों की डाली 

और अद्भुत संगीत है झरने का


दूर से देखती थी सदा

सपना यह मेरे बचपन का 


दृश्य देखते ही बनता है

इन विशालकाय पहाड़ों का


गुरूर चकनाचूर होता है

एहसास होता है अपने छोटेपन का


एक बार जो यहां आ जाए

मन नहीं करता वापस जाने का


- मंजू 

Wednesday, March 6, 2024

पुरुष

हम अक्सर बात किया करते हैं
औरत को ऊपर उठाने की

हम पुरुष को पीछे भूल गए
औरत को ऊपर उठाने में 

जिस पुरुष के जन्म लेने पर
लोग खुशियां मनाते नहीं थकते

उस पुरुष की उम्र बीत जाती है
औरत की खिदमत करते करते

कभी मां की मर्यादा का मान रखना
कभी बहना की राखी की लाज रखना

कभी पत्नी की इच्छा पूरी करना
कभी बिटिया की खुशियों का ख्याल रखना

औरत की खिदमत करते करते
वह भूल ही गया अपना ख्याल रखना

कोई आंसू न देख ले उसके
वह किसी की आंखों में नहीं देखता

परेशानियां तो लाखों होती हैं मगर
वह कभी किसी से कुछ नहीं कहता

दर्द कितना भी हो उसके दिल में
उसके चेहरे पर नहीं झलकता

वह बस एक ही इच्छा रखता है
अपने अपनों की हर इच्छा पूरी करना

सबकी इच्छा पूरी करते करते 
अपने लिए कोई इच्छा ही नहीं रखता....। 

-मंजू 

Wednesday, January 10, 2024

अनामिका

तेरे आने से ज़िन्दगी में
नई बहार आई है

मायूस हुए चेहरों पर 
फिर से मुस्कान आई है

चारों तरफ़ उजाला है
घर में खुशहाली छाई है

पिता की आंखें नम हैं
माँ मन्द-मन्द मुस्काई है

ख़ामोशी भरे आंगन में
किलकारियों की गूंज लाई है

गंभीरता भरी तस्वीर में
शरारतों के रंग लाई है

तेरे आगमन की माँ-पापा को
देते सभी बधाई हैं

बेटी के रूप में
नन्हीं-सी परी आई है

तेरे आने से घर में
एक नई उलझन भी आई है

क्या कहकर पुकारें तुझे
इसकी अलग लड़ाई है

प्यारी-सी 'प्रिया' कहूँ
या कहूँ तुझे 'आराध्या'

अजेय 'अपराजिता' कहूँ
या कहूँ तुझे 'आकांक्षा'

जब तक नाम नहीं मिलता
कहूँगी तुझे 'अनामिका'

'खुशी' कहूँ 'ख़ुशबू' कहूँ
या कहूँ तुझे 'मुस्कान'

हमने तो दुआएं भेज दी 
तुम रहो बेशक़ गुमनाम

-मंजू