आज यहां धरती पर, ऐसा कोहराम छाया है
न ज़ोर चला एड्स, स्वाइन, कैंसर, डेंगू का
तो अब शैतान नया आया है
नाम कोरोना है जिसका, चीन में जन्म पाया है
कुछ कहर है कुदरत का, कुछ मूर्खों की मेहरबानी है
इन सबसे लड़कर जीतने की, हिम्मत हमें जुटानी है
अब भी वक़्त है सम्भल जाओ, इसके कहर को पहचानो
नहीं तो इस धरती पर, बचनी सिर्फ़ निशानी है
फिर कहाँ पालोगे गौ माता, अरे कहाँ तुम कुर्बानी दोगे
कहाँ मांगोगे आज़ादी, अरे कहाँ तुम नारे लगाओगे
मंदिर-मस्जिद की आग में, कैसे तुम घी डालोगे
कहाँ बांटोगे ज्ञान तुम, अरे कहाँ तुम दीये जलाओगे।