अमावस की अँधेरी रात हो,
या पूनम के चाँद की सौगात;
सिंधु जीवन दायिनी हो,
या गंगा का आशीर्वाद;
कीचड़ में खिला कमल हो,
या महकता हो गुलाब;
इन सबसे सीखी है मैंने,
यारों एक ही बात;
उम्मीद का दामन थामे रहना,
कैसे भी हों हालात;
सफ़र-ए-ज़िन्दगी में,
कोई तुमको डिगाए लाख;
कोशिशों के भंवर में गोते,
लगाते रहना लगाते रहना।