Thursday, March 7, 2024

नैनीताल की वादियों से कुछ अनुभव

मन खो-सा जाता है

इन मनमोहक वादियों में


कोई हलचल न बची

फिलहाल मेरे इस मन में 


सुंदरता के अथाह सागर में

मन कुछ यूं गोते लगाता है


असीमित-अंतहीन दृश्य में 

ख़ुद को ही भूल जाता है


अद्भुत है यह अनुभव

शब्द भी कम भी कम पड़ जाते हैं


सीमित शब्दों में असीमित अनुभव

वर्णित ही नहीं हो पाते हैं 


फिर भी मन में निरंतर

नवीन विचार आते हैं 


हिमालय की गोद है

तकिया है बादलों का


आसमान की चादर है

और बिस्तर है नदियों का


दुनियादारी के शोर गुल से दूर

यहां गीत है पंछियों का


साज बनी है पेड़ों की डाली 

और अद्भुत संगीत है झरने का


दूर से देखती थी सदा

सपना यह मेरे बचपन का 


दृश्य देखते ही बनता है

इन विशालकाय पहाड़ों का


गुरूर चकनाचूर होता है

एहसास होता है अपने छोटेपन का


एक बार जो यहां आ जाए

मन नहीं करता वापस जाने का


- मंजू 

Wednesday, March 6, 2024

पुरुष

हम अक्सर बात किया करते हैं
औरत को ऊपर उठाने की

हम पुरुष को पीछे भूल गए
औरत को ऊपर उठाने में 

जिस पुरुष के जन्म लेने पर
लोग खुशियां मनाते नहीं थकते

उस पुरुष की उम्र बीत जाती है
औरत की खिदमत करते करते

कभी मां की मर्यादा का मान रखना
कभी बहना की राखी की लाज रखना

कभी पत्नी की इच्छा पूरी करना
कभी बिटिया की खुशियों का ख्याल रखना

औरत की खिदमत करते करते
वह भूल ही गया अपना ख्याल रखना

कोई आंसू न देख ले उसके
वह किसी की आंखों में नहीं देखता

परेशानियां तो लाखों होती हैं मगर
वह कभी किसी से कुछ नहीं कहता

दर्द कितना भी हो उसके दिल में
उसके चेहरे पर नहीं झलकता

वह बस एक ही इच्छा रखता है
अपने अपनों की हर इच्छा पूरी करना

सबकी इच्छा पूरी करते करते 
अपने लिए कोई इच्छा ही नहीं रखता....। 

-मंजू 

Wednesday, January 10, 2024

अनामिका

तेरे आने से ज़िन्दगी में
नई बहार आई है

मायूस हुए चेहरों पर 
फिर से मुस्कान आई है

चारों तरफ़ उजाला है
घर में खुशहाली छाई है

पिता की आंखें नम हैं
माँ मन्द-मन्द मुस्काई है

ख़ामोशी भरे आंगन में
किलकारियों की गूंज लाई है

गंभीरता भरी तस्वीर में
शरारतों के रंग लाई है

तेरे आगमन की माँ-पापा को
देते सभी बधाई हैं

बेटी के रूप में
नन्हीं-सी परी आई है

तेरे आने से घर में
एक नई उलझन भी आई है

क्या कहकर पुकारें तुझे
इसकी अलग लड़ाई है

प्यारी-सी 'प्रिया' कहूँ
या कहूँ तुझे 'आराध्या'

अजेय 'अपराजिता' कहूँ
या कहूँ तुझे 'आकांक्षा'

जब तक नाम नहीं मिलता
कहूँगी तुझे 'अनामिका'

'खुशी' कहूँ 'ख़ुशबू' कहूँ
या कहूँ तुझे 'मुस्कान'

हमने तो दुआएं भेज दी 
तुम रहो बेशक़ गुमनाम

-मंजू

नन्हीं परी

आई है एक नन्हीं परी

आसमान से उतरकर


आँखों में अनेकों सपने 

और मुट्ठी में खुशियाँ लेकर


सबके चेहरे पर जाती है

मुस्कान तुझे देखकर


चंचल मन भी शांत हो जाए

चेहरे की लालिमा देखकर


ऊपरवाले ने भेजा है तुझे

हीरे की तरह तराशकर


नन्हें -नन्हें कदमों पर

जब तू चलना सीखेगी


आँखों में खुशी के आंसू लेकर

माँ मन ही मन मुस्काएगी


नन्हें - नन्हें हाथों से

जब तू लिखना सीखेगी


गर्व से भरे पिता के भी 

चेहरे पर मुस्कान आएगी


माता - पिता का नाम रौशन करना

मेहनत से कभी न डरना


दिल से दुआ है "नन्हीं परी"

दुनिया में नाम कमाएगी


– मंजू