कुछ के लिए रटना है
कुछ लिए लिखना है
तो कुछ के सिर्फ़ पढ़ना है ?
परीक्षा क्या है ?
पता नहीं किसी को भी
फिर भी देते हुए डरते हैं
परीक्षा हो कैसी भी....
परीक्षा हमें डराने के लिए नहीं
उस डर को भगाने के लिए होती है....
हमें नीचा दिखाने के लिए नहीं
हमें हमारा हाल बताने के लिए होती है....
तो डरना क्या
उस परीक्षा से
जो हमें सताने के लिए नहीं
हमें सुधारने के लिए होती है....
परीक्षा हो चाहे कैसी भी
यह तो हमें सुधारती है....
इसलिए तो यह मुझे
बहुत ही अच्छी लगती है....
यह तो हमारे गुणों को
और भी निखारती है....
वैसे ही जैसे सोने को
पिघलाकर आग परखती है....
गुरु और प्रकृति में
सिखाने की क्षमता होती है....
गुरु सिखाकर परीक्षा लेते हैं
प्रकृति परीक्षा लेकर सिखाती है....
परीक्षा क्या है....!
इसका उत्तर सरल ही है....
परीक्षा भी एक गुरु है
जो अभ्यास करवाकर सिखाती है....!
गुरु सिखाकर परीक्षा लेते हैं
प्रकृति परीक्षा लेकर सिखाती है....
परीक्षा क्या है....!
इसका उत्तर सरल ही है....
परीक्षा भी एक गुरु है
जो अभ्यास करवाकर सिखाती है....!
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