Thursday, March 7, 2024

नैनीताल की वादियों से कुछ अनुभव

मन खो-सा जाता है

इन मनमोहक वादियों में


कोई हलचल न बची

फिलहाल मेरे इस मन में 


सुंदरता के अथाह सागर में

मन कुछ यूं गोते लगाता है


असीमित-अंतहीन दृश्य में 

ख़ुद को ही भूल जाता है


अद्भुत है यह अनुभव

शब्द भी कम भी कम पड़ जाते हैं


सीमित शब्दों में असीमित अनुभव

वर्णित ही नहीं हो पाते हैं 


फिर भी मन में निरंतर

नवीन विचार आते हैं 


हिमालय की गोद है

तकिया है बादलों का


आसमान की चादर है

और बिस्तर है नदियों का


दुनियादारी के शोर गुल से दूर

यहां गीत है पंछियों का


साज बनी है पेड़ों की डाली 

और अद्भुत संगीत है झरने का


दूर से देखती थी सदा

सपना यह मेरे बचपन का 


दृश्य देखते ही बनता है

इन विशालकाय पहाड़ों का


गुरूर चकनाचूर होता है

एहसास होता है अपने छोटेपन का


एक बार जो यहां आ जाए

मन नहीं करता वापस जाने का


- मंजू 

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