Tuesday, September 27, 2022

मन

मन नहीं है लिखने का
बस लिखती जा रही हूँ

ख़ूबसूरत बहुत है यह ज़िन्दगी
यादें हज़ारों बटोरती जा रही हूँ

मन में तूफ़ान है विचारों का
हर विचार समेटती जा रही हूँ

न जाने कब तक समेट पाऊँगी
पल-पल टूटती जा रही हूँ

रेत पर बनी आकृति-सी
पल-पल मिटती जा रही हूँ

डर लगता है लिखने से भी
पल-पल सिमटती जा रही हूँ

भावनाओं के इस अनंत भंवर में
पल-पल धँसती जा रही हूँ

हर गुज़रते लम्हे के साथ
'मैं' पल-पल बिखरती जा रही हूँ

बिखरना हर बार अंत नहीं होता
धीरे-धीरे सब समझती जा रही हूँ

बिखरने के साथ-साथ
पल-पल निखरती जा रही हूँ

भावनाओं के तूफ़ान को रोकना
पल-पल सीखती जा रही हूँ

हज़ारों परेशानियां हैं फिर भी
हर-पल जीती जा रही हूँ

ज़िन्दगी का यह अनमोल सबक
हर रोज़ सीखती जा रही हूँ

भावनाओं का भँवर भी शांत होगा
जब चेहरे पर मुस्कान और मन साफ़ होगा

तूफ़ान कितना भी बड़ा हो
ख़ुद पर विश्वास रखना

इरादे पहाड़-से मज़बूत
और हल्की-सी मुस्कान रखना

-मंजू

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