Wednesday, September 14, 2022

मुस्कान

कितना शोर है ज़मीन पर
आसमां में ख़ामोशी छाई है

भीड़ बहुत है ज़मीन पर
आसमां में सिर्फ़ तन्हाई है

हलचल है यहाँ ज़मीन पर
आसमां पत्थर-सा स्थाई है

रौशन पहाड़ है ज़मीन पर
आसमां में अंधेरी खाई है

दीयों-सी रौशनी है ज़मीन पर
आसमां ने तारों की चादर बिछाई है

बेइंतहा ख़ूबसूरती है ज़मीन पर
आसमां में भी ख़ूब गहराई है

नदी बहती है ज़मीन पर
आसमां में हवा लहराई है

न जाने कहाँ से आज
यह हवा चलकर आई है

इसके आते ही चेहरे पर
हल्की-सी मुस्कान आई है

-मंजू

17 comments: