तमाशा बनती जा रही है
लोगों की ज़िन्दगी
अब तमाशे वालों को
कोई नहीं देखता
बोझ बनती जा रही है
दिखावे की ज़िन्दगी
अब स्टेशन पर कुलियों को
कोई नहीं ढूंढता
क्या फूल क्या पत्तियाँ
सबकुछ यहाँ नकली है
अब असली फूलों को
कोई नहीं पूछता
झूठी लगने लगी है
सजावट की ज़िन्दगी
अब क़द्र भावनाओं की
कोई नहीं करता
फव्वारों की बौछारों में
मदहोश हैं सब
अब यहाँ बारिशों को
कोई नहीं पूछता
-मंजू
Are wah
ReplyDeleteThank you gaurav 😁
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