इंसानों की बस्ती में
कहर नया छाया है
क़ुदरत का बदला लेने
इस बार "कोरोना" आया है
कैद किए जिसने पशु-पक्षी
उसे कैद करने आया है
जंगल काटकर ज़मीन हथियाई जिसने
उसे छोटे-से कमरे में कैद करने आया है
जिसके कारण हिम पिघले
उसे दहशत में डुबोने आया है
ख़ुद को लगा भगवान समझने
उसे औकात दिखाने आया है
इंसान ने जितना नुकसान किया
वह हिसाब बराबर करने आया है
इंसानों की बस्ती में अंधेरा करके
उसे सही रास्ता दिखाने आया है....।
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